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आजादी के 71 साल बाद भी नहीं बनी सड़क- Road Problem in Kaimur


रामगढ़ प्रखण्ड के विशुनपुरा गांव से रामगढ़ तक जाने वाली सड़क आजादी के बाद आज तक पक्की नहीं बन सकी है. पक्की सड़क नहीं बनने के कारण लोगों को गांव तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गांव के लोगों को मुख्यालय तक पहुंचने में परेशानी होती है. जबकि गांव की दूरी प्रखण्ड मुख्यालय से सिर्फ दो किलोमीटर ही है.आजादी के 71 साल बीत जाने के बाद भी नावा गांव बुनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित है. गांव के लोगों का कहना है कि जैसे ही बारिश का मौसम शुरू होता है. वैसे ही प्रखंड कार्यालय रामगढ़ से दोनों गांव बिशनपुरा और अभैदे को जोड़ने वाली सड़क 9 महीने तक जलमग्न रहती है. गांव में 90 प्रतिशत से अधिक लोग दलित परिवार के हैं. सबसे बड़ी परेशानी तब होती है, जब गांव में लोग बीमार पड़ जाते हैं. बीमार को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है.ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के समय गांव तक नेता सड़क बनवाने का वादा करते हैं. लेकिन जैसे ही चुनाव बीत जाता है, वैसे ही नेता अपने वादे को भी भूल जाते हैं. लोगों ने बताया कि प्रखण्ड प्रमुख, जिलाधिकारी से लेकर कई नेताओं और मंत्रियों को भी आवेदन दिया गया. लेकिन, किसी को कोई परवाह नहीं है. इसलिए गांव वालों ने एक निर्णय लिया है कि आनेवाली चुनाव में रोड नहीं तो वोट नहीं के आदर्श पर चलेंगे. 18 सौ आबादी वाले गांव से अगर किसी नेता को कोई फर्क नहीं पड़ता तो, अब हम भी किसी को वोट नहीं देंगे.ग्रामीण इलाकों में लोंगो से जाकर बिकास के नाम पर तो वोट मांगते हैं मगर चुनाव जीतने के बाद उनका परछाई भी नजर नहीं आती। नेता से लेकर आलाधिकारियों तक आवेदन देकर थक गए हैं हमलोग एमजीआर कोई सुनवाई नहीं हुआ। दोनों गांव को मिलाकर करीब 2000 की जनसंख्या हैं जहां ज्यादातर लोग महादलितों में आते हैं ।इस मौके पर ग्रामीण राजेश कुमार, छोटू राम,हरिराम,लालमोहन राम,आदि लोग मौजूद रहे। चारो तरफ से थक गए हैं हमलोग लोग कहते है कि चारो तरफ से थकने के बाद मीडिया की सहारा लेना पड़ता है।




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