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क्रय-केंद्र में किसानों की फसल न बिकने से आक्रोश



कैमूर टॉप न्यूज़, चाँद. किसानो को अपने धान बेचने के लिए मजबूर दिखाई दे रहे हैं. उनकी धान अभी भी खलिहान में पडा है. मजबूरन वो अपने धान को किसी बनिये के पास ले जाकर 1400 या 1450 तक बेचने के लिए मजबूर है. किसानों का कहना है कि सरकारी क्रय-केंद्र का पता ही नही लगता यहॉ कि वो धान खरीदारी भी करता है या नही! उसमें उन्हीं के धान जाते हैं जो पदाधिकारी से सम्पर्क में रहता है. मजबूरी में हमे मौसम के देखते हुए धान को औने पौने दाम मे बेचना पडता है. किसान श्वेताभ सिंह का कहना है कि यहॉ किसानो पर किसी भी तरह का सरकारी लाभ धान क्रय केंद्र द्वारा नही मिल पाती .उसमे जिसका पावर होता है उन्ही किसानो का धान जाता है पैक्स मे धान बेचने की बात पर बताया कि पैक्स मे 1500 से लेकर 1550 तक देने कि बात करते .है वो भी सरकारी मूल्य सही रूप मे नही देते है उनका कहना होता है कि हमे भी अन्य किराया देना पडता है .जैसे मे तौलाई पोलदारी इत्यादि.आज भी किसान अपने धान मे किसी तरह बेचने के लिए मजबूर है.इक तरफ जहॉ हर जगह किसानो के दुगुनी आय की बात की जा रही है वही दूसरी तरफ किसान मजबूर दिख रहे है.किसानो से पूछे जाने पर कि आपने इसका कंप्लेंन कही किया तो उनका बहुत ही सरल जबाब था. कि धान पैदा करने के बाद हम कंप्लेंन करे या धान बेचे और कंप्लेंन का कोई असर नही दिखेगा बल्कि नुकसान भी हमारा ही होग.इस लाचारी और तंगहाली से बेबस हो आज भी किसान अपने धानो को बेचने के लिए मजबूर है.
रिपोर्ट-  देवानंद पाण्डेय

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