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प्राकृतिक सम्पदाओं को पहुँचाया जा रहा नुकशान, वन विभाग बेखबर

कैमूर टॉप न्यूज़,कैमूर: जिले में वन संपदाओं की सुरक्षा में वन विभाग पीछे है.वन विभाग की सुस्ती के कारण वन संपदाओं को लगातार कारोबारियों द्वारा क्षति पहुंचाया जा रहा है.जिले के अधौरा, चैनपुर, भगवानपुर तथा रामपुर प्रखंड में कई जगहों पर पेड़ों को काटकर घरेलू उपयोग के लिए लाया जा रहा है. जहां काटे गए पेड़ों को चौकी, टेबल, कुर्सी, के साथ साथ जलावन के कार्य में भी उपयोग किया जाता है.जिससे पेड़ों की संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है. ऐसा पहाड़ी क्षेत्र के समीप में बसे गांव तथा उसके आसपास गांवों में ज्यादातर किया जाता है. अगर एक आंकड़ा के मुताबिक देखा जाए तो जिले में अभी तक एक लाख 14 हजार लोगों ने गैस कनेक्शन कराया गया है. जबकि 2011 के जनगणना के मुताबिक जिले में साढ़े सोलह लाख लोग है.ऐसे में यह खुद सामने आ जाता है की बाकि शेष लोग आज भी गैस चुल्हा की जगह लकड़ी का जलावन कर के खाना पकाते है. लकड़ी लाने के लिए वन या पहाड़ी की ओर निकलते है. जहां से वे चोरी छिपे लकड़ी काट कर लाते है. या पहाड़ी के पास के लोग शाम को वन में या पहाड़ी पर जाकर लकड़ी काट कर लाते है. उसके बाद सुबह चार बजे ही उसको लेकर आसपास के गांव में निकल कर बेच आते है.उसके बाद यह कार्य उनकी रोज की हो जाती है .

पत्थर कारोबारी भी सक्रिय की भूमिका में- लकड़ी के कारोबारी तथा पत्थर के कारोबारी सक्रिय भूमिका में दिख रहे है. जिससे जिले के कई जगहों पर पत्थर तोड़ कर पटिया बनाने, तथा लकड़ी को काट कर बेचने वाले बिना डर के काम कर रहे है. जिले के चैनपुर, रामपुर, अधौरा, तथा भगवानपुर क्षेत्र में ऐसा कार्य ज्यादा देखने को मिलता है. पत्थर के कारोबारी कई बार वन विभाग के गिरफ्त में भी आ चुके है. लेकिन वन विभाग के धर पकड़ के बाद भी कारोबारी सक्रिय है. इसके अलावा केंदू पत्ता के कारोबारी भी सक्रिय है. पूर्व के दिनों में वन विभाग की गश्ती चली थी.उस समय कारोबारी हरकत में आ गए थे.

क्या कहते हैं डीएफओ: इस संबंध में पूछे जाने पर डीएफओ सत्यजीत कुमार ने बताया की वन संपदा को क्षति पहुंचाने वालों के लिए गश्ती अभियान चलाई जा रही है. अगर कोई वन संपदा को क्षति पहुंचाते हुए पकड़ा जाता है. तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाती है.


कैमूर टॉप न्यूज़ के लिए अभिषेक राज की रिपोट



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