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Kaimur Top News: लाखों की लागत से बनी सब्जी मंडी छोड़ सड़कों पर कब्ज़ा जमाये सब्जी विक्रेता

कैमूर  टॉप न्यूज़,मोहनिया: नगर में लाखों की लागत से बनी सब्जी मंडी वीरान पड़ी है. सब्जी विक्रेता सड़क पर अतिक्रमण कर सब्जी बेच रहे हैं.जिससे नगर में आये दिन जाम की समस्या उत्पन्न होती है.जिस शान शौकत के साथ मोहनियां में सब्जी मंडी का निर्माण हुआ था. उसे देखकर यही लगा कि इसका एक स्थान होगा. कुछ दिनों तक इसमें काफी चहल-पहल रही. ग्राहक शौक से यहां सब्जी खरीदने आते थे. कुछ समय बाद इसपर ग्रहण लगने लगा.दुकानदार पलायन कर गए. अब सड़कों पर सब्जी की दुकान लगाते हैं. मोहनियां में अतिक्रमणकारियों में अधिकतम सब्जी बेचने वाले हैं.इसके लिए प्रशासनिक पदाधिकारी और नगर पंचायत जिम्मेदार है.

 ज्ञात हो कि 6 नवंबर 2004 को 24 लाख की लागत से बनकर तैयार इस सब्जी मंडी का उद्घाटन तत्कालीन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मीरा कुमार ने किया था. मौके पर बिहार सरकार के तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह भी मौजूद थे.अपने संबोधन में उक्त नेताओं ने सब्जी मंडी को मोहनियां की जरुरत बताया था. सब्जी मंडी को तीन श्रेणियों में बांट कर दुकानदारों से प्राप्त अग्रिम धन राशि से निर्माण कार्य पूरा हुआ था.जिसमें सुपर मार्केट के नाम से 12, फड़ दुकान 62, शेड दुकान 40 सहित 114 दुकानें शामिल हैं.सब्जी मंडी के निर्माण में मोहनियां के तत्कालीन मुखिया सह वार्ड संख्या 9 के वर्तमान वार्ड पार्षद अनिल कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तब और दुकान के लिए पांच हजार रुपये एवं शेड दुकान के लिए इच्छुक दुकानदारों से 17 हजार रुपये लिए गए थे.इस राशि का आधा किराया में समायोजित करना था. उद्घाटन के बाद कुछ दिनों तक हर तरह की सब्जियों से यह मंडी गुलजार रही.ग्राहकों को यह सब्जी मंडी बरबस आकर्षित करती थी. एक लाइन से बनी दुकानों में जाने के लिए दो तरफ से रास्ता बना है. ग्राहक शौक से यहां आते थे.एक साल बाद इस सब्जी मंडी के ग्रहण का दौर शुरू हो गया.धीरे-धीरे सब्जी बेचने वालों ने चांदनी चौक और स्टूवरगंज बाजार का रुख किया.


 सड़क पर अतिक्रमण कर दुकानदार सब्जी बेचने लगे। कोई जमीन पर तो कोई ठेला पर सब्जी बेचने लगा. बस पड़ाव से नजदीक होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इधर ही सब्जी खरीदने लगे. सब्जी मंडी में ग्राहकों का टोटा पड़ने लगा. वहां के सब्जी विक्रेताओं को लगा कि चांदनी चौक पर बिक्री अधिक है. धीरे धीरे वे ठेला पर सब्जी लेकर स्टूवरगंज बाजार में चले आए. बिक्री में भारी कमी आने से सब्जी मंडी के दुकानदारों को घाटा होने लगा. यहां तक की किराया भुगतान भी घर से ही करना पड़ा.सब्जियों का नुकसान हुआ अलग.स्थानीय प्रशासन दुकानदारों के पलायन व अतिक्रमण पर रोक मुनासिब नहीं समझा.आज लाखों रुपए की लागत से बनी सब्जी मंडी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है

 सड़कों पर सब्जी विक्रेताओं का कब्जा है.यह नगर में जाम की सबसे बड़ी समस्या है. स्टूवरगंज बाजार में एक लाइन से जमीन और ठेला पर दर्जनों सब्जी की दुकानें लगती हैं.जिससे नगर के इस मुख्य बाजार में राहगीरों का चलना मुश्किल होता है.ठेला वाले सब्जी विक्रेता महिलाओं पर फब्तियां कसते हैं. मौका मिलने पर महिलाओं से छेड़खानी करने से भी बाज नहीं आते.विरोध करने पर राहगीरों से मारपीट पर उतारू हो जाते हैं.
क्या कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी:

इस संबंध में पूछे जाने पर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संजय उपाध्याय ने कहा कि सब्जी मंडी को चालू करने का प्रयास किया जा रहा है. सड़क पर अतिक्रमण कर सब्जी बेचने वालों को सब्जी मंडी में लाया जाएगा.जिससे नगर में जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी.







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