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चमकी बुखार पर बिफरे बसपा नेता जामा खान, दी कड़ी प्रतिक्रिया...


कैमूर टॉप न्यूज़, कैमूर:  बिहार बसपा प्रदेश महासचिव जामा खान ने चमकी बुखार पर हो रही मासुम बच्चों की मौत पर केन्द्र व राज्य सरकार को कोसते हुए  कहा कि सरकार पिछले साल हुई मासुमों की मौत से कोई सबक नही ली. जिसकी वजह से  इस साल दो सौ से ज्यादा मासुम काल के गाल मे समा गए. अधिकारी और मंत्री केवल दौरा कर रहे हैं और मीडिया कर्मियों द्वारा सवाल पूछे जाने पर उन पर तंज कस रहे हैं. आज हालात यह है कि बिहार के हर जिले से बच्चे चमकी बुखार से पीड़ित हो काल के गाल में समा रहे हैं और सरकार आंखें बंद कर नींद मे सो रही है. बिहार में डबल इंजन की सरकार तो है लेकिन बजाए बच्चों को बचाने के सत्ता में बैठे लोग एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. राज्य सरकार और केंद्र सरकार में ठनी हुई है. कई जांच टीमें आई और गई. लेकिन कोई हल नहीं निकला. यहां रोजगार का भी यही हाल है. इससे पहले कांग्रेश की भी सरकार रही है. लेकिन बिहार में विकास के नाम पर कोई प्रगति नहीं हुई है.  मैं बीएचयू में पहला अल्पसंख्यक छात्र संघ उपाध्यक्ष रहा हूं और 2005 से चैनपुर से पहला चुनाव लड़ा था. तब से लेकर आज तक मैं गरीबों की लड़ाई लड़ता आया हूं. इस क्षेत्र के लोगों को मैं अपना परिवार मानता हूं और निस्वार्थ भाव से बिजली पानी और मूलभूत समस्याएं होने पर खुद इन के लिए लड़ता हूं.   यहां की सबसे बड़ी समस्या किसानों की है. यहां पानी और बिजली की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. क्षेत्र में कई जगह ऐसे हैं. जहां रोड नहीं है. बिजली सही नहीं है और तो और यहां के चैनपुर,खरीगांवा, कुरड़,भगवानपुर,बखारी देवी के अस्पतालों में दवा नहीं है. डॉक्टर भी समय से नहीं बैठते और जो बैठते हैं. वह मरीजों को दवा देने के जगह बहाना कर रेफर कर देते हैं. जिससे वह रास्ते में ही दम तोड़ देता है. मंत्री जी ने इस पर भी कभी ध्यान नहीं दिया. यहां का विकास का प्रतिशत जीरो है. किसान का बेटा होने की वजह से यहां के लोगों का दुख दर्द मैं समझता हूं और निस्वार्थ भाव से सेवा करता हूं. आने वाले समय में यदि मुझे जनता ने मौका दिया तो एक तरफ अजान होगा और दूसरी तरफ घंटा बजेगा और सबको साथ लेकर चलने को मैं विश्वास दिलाता हूं. पर्यटन के क्षेत्र में भी हमारा क्षेत्र विकास नहीं कर पाया. जिससे कई रोजगार सृजित हो सकते थे. सरकारी उदासीनता की वजह से अधौरा से लेकर करकट गढ़ तक पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद किसी भी नेता मंत्री यहां तक कि मुख्यमंत्री जी ने भी सिर्फ घोषणाएं करने के अलावा कोई काम नहीं किया. अधौरा तो कुव्यवस्था का इतना दंश झेल रहा है कि 108 गांव होने के बावजूद कहीं भी आपको मोबाइल का नेटवर्क नहीं मिलेगा. स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलेगी,शुद्ध पानी नहीं मिलेगा,खाने की व्यवस्था ढंग की नहीं है. जिससे लोगों में कुपोषण फैल रहा है. तेंदूपत्ता और महुआ पर सरकार के रुख के बाद यहां बेरोजगारों और असामाजिक तत्वों की तादात बढ़ी है. इतिहास साक्षी है कि यहां से अच्छे से अच्छे नेता चुनकर गए हैं. देश में, लेकिन किसी ने भी इस जिले के बारे में चिंतन नहीं किया. यहां के बच्चे गुजरात दुबई महाराष्ट्र कहीं भी जाते हैं. पीटकर आते हैं उनके रोजगार के बारे में भी कोई नहीं सोचता. जिससे आज के समय में यह क्षेत्र हाशिए पर चला गया है.


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